आगमन निगमन शिक्षण विधि

आगमन निगमन शिक्षण विधि
40問 • 1年前
  • Rajan Singh Meharu
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    問題一覧

  • 1

    "स्थूल तत्वों के आधार पर अपनी मानसिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए किसी विशेष सिद्धांत, नियम अथवा सूत्र तक पहुंचता है, विशिष्ट से सामान्य की ओर या स्थूल से सूक्ष्म की ओर जो नियम निकलवाए जाते हैं वे आगमन विधि के अंतर्गत आते हैं" यह परिभाषा किसने दी

    यंग

  • 2

    "जब हम बालकों के सम्मुख बहुत से तथ्य, उदाहरण या वस्तुएं प्रस्तुत करते हैं और फिर उनसे अपने स्वयं के निष्कर्ष निकलवाने का प्रयत्न करते हैं तब हम शिक्षण की आगमन विधि का प्रयोग करते हैं। " यह परिभाषा किसने दी

    लेडन

  • 3

    आगमन विधि की प्रक्रिया के पद क्रमानुसार बताएं 1. आवश्यक उदाहरण प्रस्तुत करना 2. उदाहरण का निरीक्षण करना 3. उदाहरण के आधार पर किसी सामान्य नियम का निर्धारण करना 4. नियमों का परीक्षण एवं सत्यापन की पुष्टि करना

    1,2,3,4

  • 4

    निर्गमन विधि की प्रक्रिया के पद क्रमानुसार बताएं 1. प्रकरण पर आधारित नियमों , सूत्रों व सिद्धांतों का प्रस्तुतीकरण। 2. विशिष्ट उदाहरणों की प्रस्तुति 3. उदाहरणों को नियमों से संबंधित करना व संस्थापन करना।

    1,2,3

  • 5

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. विशिष्ट से सामान्य की ओर 2. सामान्य से विशिष्ट की ओर 3. स्थूल से सूक्ष्म की ओर 4. सूक्ष्म से स्थूल की ओर 5. यथार्थ से अमूर्त की ओर शिक्षण सूत्र प्रयुक्त होते हैं 6. अमूर्त से यथार्थ की ओर शिक्षण सूत्र प्रयुक्त होते हैं

    1,3,5

  • 6

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. विशिष्ट से सामान्य की ओर 2. सामान्य से विशिष्ट की ओर 3. स्थूल से सूक्ष्म की ओर 4. सूक्ष्म से स्थूल की ओर 5. यथार्थ से अमूर्त की ओर शिक्षण सूत्र प्रयुक्त होते हैं 6. अमूर्त से यथार्थ की ओर शिक्षण सूत्र प्रयुक्त होते हैं

    2,4,6

  • 7

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह विकासोन्मुख व क्रियाशील क्रियाविधि है। 2. इसमें बालक को नियम, सूचना, सूत्र तथा तथ्य पहले ही बता दिये जाता है अतः बालक क्रियाशील नहीं रहता है। 3. इसमें बालक की आवश्यकता व रुचि का ध्यान रखा जाता है 4. इसमें बालक की आवश्यकता व रुचि का ध्यान नहीं रखा जाता है। 5. इसमें विद्यार्थी उदाहरणों की सहायता से स्वयं नियम बनाते हैं, इससे उनमें खोज की प्रवृत्ति का विकास होता है। 6. यह पूर्व स्थापित नियमों व तथ्यों के मध्य संबंध स्थापना का कार्य करती है।

    1,3,5

  • 8

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह विकासोन्मुख व क्रियाशील क्रियाविधि है। 2. इसमें बालक को नियम, सूचना, सूत्र तथा तथ्य पहले ही बता दिये जाता है अतः बालक क्रियाशील नहीं रहता है। 3. इसमें बालक की आवश्यकता व रुचि का ध्यान रखा जाता है 4. इसमें बालक की आवश्यकता व रुचि का ध्यान नहीं रखा जाता है। 5. इसमें विद्यार्थी उदाहरणों की सहायता से स्वयं नियम बनाते हैं, इससे उनमें खोज की प्रवृत्ति का विकास होता है। 6. यह पूर्व स्थापित नियमों व तथ्यों के मध्य संबंध स्थापना का कार्य करती है।

    2,4,6

  • 9

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. स्वयं सूत्र के निर्माण से अधिगम स्थाई होता है। सूत्र रटने नहीं पड़ते। 2. सूत्र रटने पड़ते हैं, अतः अधिगम अधिक स्थाई नहीं रह पाते। 3. नियमों व सिद्धांतों का निर्माण क्यों व कैसे तर्क द्वारा होता है। 4. तर्क करने की आवश्यकता ही नहीं होती क्योंकि नियम पूर्व स्थापित होते हैं। 5. क्रियाशीलता आधारित विधि है। 6. अधिगमकर्ता को निष्क्रिय माना जाता है।

    1,3,5

  • 10

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. स्वयं सूत्र के निर्माण से अधिगम स्थाई होता है। सूत्र रटने नहीं पड़ते। 2. सूत्र रटने पड़ते हैं, अतः अधिगम अधिक स्थाई नहीं रह पाते। 3. नियमों व सिद्धांतों का निर्माण क्यों व कैसे तर्क द्वारा होता है। 4. तर्क करने की आवश्यकता ही नहीं होती क्योंकि नियम पूर्व स्थापित होते हैं। 5. क्रियाशीलता आधारित विधि है। 6. अधिगमकर्ता को निष्क्रिय माना जाता है।

    2,4,6

  • 11

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इस विधि में बालक में वैज्ञानिक दृष्टिकोण व अवलोकन क्षमता का विकास होता है। 2. यह रटने की प्रवृत्ति को विकसित करती है तथा वैज्ञानिक विधि व वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करने में असमर्थ है। 3. यह गणित शिक्षण की मनोवैज्ञानिक एवं रोचक प्रणाली है। 4. यह मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों के विपरीत अप्राकृतिक विधि है, क्योंकि विद्यार्थियों को पूर्व में निर्धारित नियमों का सत्यापन मात्र करना होता है। 5. प्राप्त ज्ञान व्यवहारिक व स्थाई होता है, क्योंकि बालक स्वयं करके सीखता है। इस विधि में छात्र किसी नियम की पुष्टि उदाहरणों द्वारा करता है अतः वह जो भी ज्ञान प्राप्त करता है वह उसके मस्तिष्क में दृढ़ हो जाता है। 6. प्राप्त ज्ञान अस्पष्ट व अस्थाई होता है, विद्यार्थी यंत्रवत कार्य करते हैं।

    1,3,5

  • 12

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इस विधि में बालक में वैज्ञानिक दृष्टिकोण व अवलोकन क्षमता का विकास होता है। 2. यह रटने की प्रवृत्ति को विकसित करती है तथा वैज्ञानिक विधि व वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करने में असमर्थ है। 3. यह गणित शिक्षण की मनोवैज्ञानिक एवं रोचक प्रणाली है। 4. यह मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों के विपरीत अप्राकृतिक विधि है, क्योंकि विद्यार्थियों को पूर्व में निर्धारित नियमों का सत्यापन मात्र करना होता है। 5. प्राप्त ज्ञान व्यवहारिक व स्थाई होता है, क्योंकि बालक स्वयं करके सीखता है। इस विधि में छात्र किसी नियम की पुष्टि उदाहरणों द्वारा करता है अतः वह जो भी ज्ञान प्राप्त करता है वह उसके मस्तिष्क में दृढ़ हो जाता है। 6. प्राप्त ज्ञान अस्पष्ट व अस्थाई होता है, विद्यार्थी यंत्रवत कार्य करते हैं।

    2,4,6

  • 13

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इसमें बालक में तर्क एवं आत्मविश्वास परिपुष्ट होता है, सूझ द्वारा ज्ञान प्राप्त होता है, तथा निरीक्षण शक्ति का विकास होता है। यह विधि चैतन्यता व आत्मविश्वास जागृत करती है। यह विधि भावी जीवन में खोज का मार्ग प्रशस्त करती है। यह विधि स्वयं खोज पर आधारित विधि है। 2. इस विधि में तर्क, चिंतन व खोज आदि शक्तियां विकसित नहीं हो पाती हैं। 3. किस विधि में सरलता से नियम का निर्माण किया जा सकता है, अतः यह एक सरल व रोचक विधि है। 4. विद्यार्थियों को निष्कर्ष व नियम पूर्व में ही ज्ञात होता है अतः रुचि नहीं रह पाती है। 5. इस विधि द्वारा सीखने में समय व शक्ति का अत्यधिक अपव्यय होता है तथा इस विधि द्वारा समस्त नियमों का शिक्षण संभव नहीं है। 6. इस विधि में समय की बचत होती है। पाठ्यक्रम शीघ्रता से पूर्ण हो सकता है।

    1,3,5

  • 14

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इसमें बालक में तर्क एवं आत्मविश्वास परिपुष्ट होता है, सूझ द्वारा ज्ञान प्राप्त होता है, तथा निरीक्षण शक्ति का विकास होता है। यह विधि चैतन्यता व आत्मविश्वास जागृत करती है। यह विधि भावी जीवन में खोज का मार्ग प्रशस्त करती है। यह विधि स्वयं खोज पर आधारित विधि है। 2. इस विधि में तर्क, चिंतन व खोज आदि शक्तियां विकसित नहीं हो पाती हैं। 3. किस विधि में सरलता से नियम का निर्माण किया जा सकता है, अतः यह एक सरल व रोचक विधि है। 4. विद्यार्थियों को निष्कर्ष व नियम पूर्व में ही ज्ञात होता है अतः रुचि नहीं रह पाती है। 5. इस विधि द्वारा सीखने में समय व शक्ति का अत्यधिक अपव्यय होता है तथा इस विधि द्वारा समस्त नियमों का शिक्षण संभव नहीं है। 6. इस विधि में समय की बचत होती है। पाठ्यक्रम शीघ्रता से पूर्ण हो सकता है।

    2,4,6

  • 15

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यदि बालक एक बार अशुद्ध सिद्धांत या नियम निकाल लेता है तो उसे पुनः शुद्ध ज्ञात करना कठिन हो जाता है। 2. इस विधि द्वारा ज्ञात नियमों की सत्यता की जांच आसानी से हो जाती है। 3. केवल योग्य एवं प्रतिभाशाली छात्र ही तथ्यों के आधार पर सामान्य नियमों का निर्धारण कर सकते हैं। 4. नियम पहले से निर्धारित होते हैं। यह विधि उच्च कक्षा के विद्यार्थियों के लिए ही उपयोगी है। 5. यह विधि विशेष तौर पर अंकगणित तथा रेखा गणित में अधिक प्रयुक्त होती है। 6. यह विधि बीजगणित में अधिक प्रयुक्त होती है जहां सूत्र याद रखने का कार्य अधिक होता है।

    1,3,5

  • 16

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यदि बालक एक बार अशुद्ध सिद्धांत या नियम निकाल लेता है तो उसे पुनः शुद्ध ज्ञात करना कठिन हो जाता है। 2. इस विधि द्वारा ज्ञात नियमों की सत्यता की जांच आसानी से हो जाती है। 3. केवल योग्य एवं प्रतिभाशाली छात्र ही तथ्यों के आधार पर सामान्य नियमों का निर्धारण कर सकते हैं। 4. नियम पहले से निर्धारित होते हैं। यह विधि उच्च कक्षा के विद्यार्थियों के लिए ही उपयोगी है। 5. यह विधि विशेष तौर पर अंकगणित तथा रेखा गणित में अधिक प्रयुक्त होती है। 6. यह विधि बीजगणित में अधिक प्रयुक्त होती है जहां सूत्र याद रखने का कार्य अधिक होता है।

    2,4,6

  • 17

    किसी त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180 डिग्री होता है, नियम के निर्माण हेतु किस विधि का प्रयोग करेंगे

    आगमन विधि

  • 18

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह विधि "विशिष्ट से सामान्य" "उदाहरण से नियम" "स्थूल से सूक्ष्म की ओर" है। 2. यह विधि "सामान्य से विशिष्ट" "नियम से उदाहरण" तथा "सूक्ष्म से स्थूल की ओर" है। 3. इसमें बालक एक अनुसंधानकर्ता के रूप में कार्य करता है तथा स्वयं सक्रिय रहकर नियम या सूत्र ज्ञात करता है । 4. किसने बालक को नियम अथवा सूत्र पहले ही बता दिए जाते हैं। बालक खोजे गए नियम अथवा सूत्रों की पुष्टि मात्र ही कर पता है। 5. इस विधि द्वारा छात्रों में खोज प्रवृत्ति का विकास होता है। 6. इसमें छात्रों को खोज प्रवृत्ति विकसित करने का अवसर नहीं मिलता है।

    1,3,5

  • 19

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह विधि "विशिष्ट से सामान्य" "उदाहरण से नियम" "स्थूल से सूक्ष्म की ओर" है। 2. यह विधि "सामान्य से विशिष्ट" "नियम से उदाहरण" तथा "सूक्ष्म से स्थूल की ओर" है। 3. इसमें बालक एक अनुसंधानकर्ता के रूप में कार्य करता है तथा स्वयं सक्रिय रहकर नियम या सूत्र ज्ञात करता है । 4. किसने बालक को नियम अथवा सूत्र पहले ही बता दिए जाते हैं। बालक खोजे गए नियम अथवा सूत्रों की पुष्टि मात्र ही कर पता है। 5. इस विधि द्वारा छात्रों में खोज प्रवृत्ति का विकास होता है। 6. इसमें छात्रों को खोज प्रवृत्ति विकसित करने का अवसर नहीं मिलता है।

    2,4,6

  • 20

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह अध्यापन की श्रेष्ठ विधि है। 2. यह अध्ययन या अधिगम की श्रेष्ठ विधि है। 3. यह विधि छोटी कक्षाओं के शिक्षण में अधिक उपयोगी है। 4. यह विधि उच्च कक्षाओं के लिए अधिक उपयोगी है। 5. इस विधि में बालक स्वयं नियम एवं सूत्रों का निर्धारण करते हैं, जिससे उनमें आत्मविश्वास एवं आत्मनिर्भरता जैसे गुणों का विकास होता है । 6. इसमें नियम या सूत्रों को पहले ही बता दिया जाता है जिससे उनमें आत्मविश्वास की कमी रहती है ।

    1,3,5

  • 21

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह अध्यापन की श्रेष्ठ विधि है। 2. यह अध्ययन या अधिगम की श्रेष्ठ विधि है। 3. यह विधि छोटी कक्षाओं के शिक्षण में अधिक उपयोगी है। 4. यह विधि उच्च कक्षाओं के लिए अधिक उपयोगी है। 5. इस विधि में बालक स्वयं नियम एवं सूत्रों का निर्धारण करते हैं, जिससे उनमें आत्मविश्वास एवं आत्मनिर्भरता जैसे गुणों का विकास होता है । 6. इसमें नियम या सूत्रों को पहले ही बता दिया जाता है जिससे उनमें आत्मविश्वास की कमी रहती है ।

    2,4,6

  • 22

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह विधि नवीन ज्ञान की खोज करने में सहायक है। 2. इस विधि में बालक दूसरों के द्वारा दिए गए ज्ञान का प्रयोग करते हैं। 3. यह एक वैज्ञानिक विधि है, जिससे छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होता है। 4. इस विधि में बालकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होने के अवसर नहीं मिलते हैं। 5. यह विधि खोज या अनुसंधान का मार्ग है। 6. यह अनुकरण का मार्ग है।

    1,3,5

  • 23

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह विधि नवीन ज्ञान की खोज करने में सहायक है। 2. इस विधि में बालक दूसरों के द्वारा दिए गए ज्ञान का प्रयोग करते हैं। 3. यह एक वैज्ञानिक विधि है, जिससे छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होता है। 4. इस विधि में बालकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होने के अवसर नहीं मिलते हैं। 5. यह विधि खोज या अनुसंधान का मार्ग है। 6. यह अनुकरण का मार्ग है।

    2,4,6

  • 24

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इस विधि में शिक्षक व शिक्षार्थी दोनों ही सक्रिय रहते हैं। अतः यह विधि छात्र केंद्रित विधि है। 2. इस विधि में शिक्षक ही अधिक सक्रिय रहता है। शिक्षार्थी एक मूक श्रोता होता है। अतः यह अध्यापक केंद्रित विधि है। 3. यह विधि मौलिक एवं रचनात्मक कार्यों पर बल देती है। 4. यह विधि समस्या समाधान पर बल देती है। 5. इस विधि में अध्ययन अध्यापन की प्रक्रिया रुचिकर हो जाती है। 6. इस विधि में अध्ययन अध्यापन की प्रक्रिया नीरस हो जाती है।

    1,3,5

  • 25

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इस विधि में शिक्षक व शिक्षार्थी दोनों ही सक्रिय रहते हैं। अतः यह विधि छात्र केंद्रित विधि है। 2. इस विधि में शिक्षक ही अधिक सक्रिय रहता है। शिक्षार्थी एक मूक श्रोता होता है। अतः यह अध्यापक केंद्रित विधि है। 3. यह विधि मौलिक एवं रचनात्मक कार्यों पर बल देती है। 4. यह विधि समस्या समाधान पर बल देती है। 5. इस विधि में अध्ययन अध्यापन की प्रक्रिया रुचिकर हो जाती है। 6. इस विधि में अध्ययन अध्यापन की प्रक्रिया नीरस हो जाती है।

    2,4,6

  • 26

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इस विधि में प्रत्येक पद का महत्व होता है तथा बालक उनको लिखना सीख जाते हैं। 2. इस विधि में बालक बहुत से पदों को लिखना नहीं सीख पाते हैं। 3. इस विधि की गति धीमी है, जिससे परिश्रम व समय अधिक लगता है। 4. इस विधि की गति तीव्र होती है, जिससे परिश्रम का समय कम लगता है। 5. यह एक मनोवैज्ञानिक विधि है, जो कि अवबोध केंद्रित है। 6. यह एक अमनोवैज्ञानिक विधि है तथा स्मृति केंद्रित है।

    1,3,5

  • 27

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इस विधि में प्रत्येक पद का महत्व होता है तथा बालक उनको लिखना सीख जाते हैं। 2. इस विधि में बालक बहुत से पदों को लिखना नहीं सीख पाते हैं। 3. इस विधि की गति धीमी है, जिससे परिश्रम व समय अधिक लगता है। 4. इस विधि की गति तीव्र होती है, जिससे परिश्रम का समय कम लगता है। 5. यह एक मनोवैज्ञानिक विधि है, जो कि अवबोध केंद्रित है। 6. यह एक अमनोवैज्ञानिक विधि है तथा स्मृति केंद्रित है।

    2,4,6

  • 28

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. नियम ज्ञात करने होते हैं इसलिए अध्यापक को अधिक परिश्रम की आवश्यकता होती हैैं अतः अनुभवी व प्रशिक्षित अध्यापकों की कमी के कारण यह विधि सफल नहीं हो पाती है। 2. नियम पहले से ज्ञात होते हैं अतः अनुभवी व प्रशिक्षित अध्यापकों की अधिक आवश्यकता नहीं होती। 3. किस विधि में विद्यार्थियों को सूत्र नियम याद नहीं रखने होते हैं। 4. इस विधि में विद्यार्थियों को कई सूत्र, सिद्धांत एवं नियम याद करने होते हैं, इससे विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति का विकास होता है। इस विधि में छात्रों को रटने की आदत पड़ जाती है जिससे उनका मानसिक विकास नहीं हो पता है। इस विधि से प्राप्त ज्ञान अस्थाई होता है क्योंकि सीखे गए नियमों, सिद्धांतों को ज्ञात करने की विधि छात्रों को नहीं सिखाई जाती है। इस विधि में भिन्न-भिन्न प्रकार के प्रश्नों के लिए अनेक सूत्र याद करने होते हैं जो एक कठिन कार्य है। 5. इस विधि में छात्रों को अधिक परिश्रम करना पड़ता है। 6. इस विधि में छात्रों को नियम पहले ही बता दिए जाते हैं अतः उन्हें कम परिश्रम करना पड़ता है।

    1,3,5

  • 29

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. नियम ज्ञात करने होते है इसलिए अध्यापक को अधिक परिश्रम की आवश्यकता होती हैैं। अतः अनुभवी व प्रशिक्षित अध्यापकों की कमी के कारण यह विधि सफल नहीं हो पाती है। 2. नियम पहले से ज्ञात होते हैं अतः अनुभवी व प्रशिक्षित अध्यापकों की अधिक आवश्यकता नहीं होती। 3. किस विधि में विद्यार्थियों को सूत्र नियम याद नहीं रखने होते हैं। 4. इस विधि में विद्यार्थियों को कई सूत्र, सिद्धांत एवं नियम याद करने होते हैं, इससे विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति का विकास होता है। इस विधि में छात्रों को रटने की आदत पड़ जाती है जिससे उनका मानसिक विकास नहीं हो पता है। इस विधि से प्राप्त ज्ञान अस्थाई होता है क्योंकि सीखे गए नियमों, सिद्धांतों को ज्ञात करने की विधि छात्रों को नहीं सिखाई जाती है। इस विधि में भिन्न-भिन्न प्रकार के प्रश्नों के लिए अनेक सूत्र याद करने होते हैं जो एक कठिन कार्य है। 5. इस विधि में छात्रों को अधिक परिश्रम करना पड़ता है। 6. इस विधि में छात्रों को नियम पहले ही बता दिए जाते हैं अतः उन्हें कम परिश्रम करना पड़ता है।

    2,4,6

  • 30

    निगमन विधि के बारे में निम्न में से कौन सा कथन असत्य है

    यह प्रत्यक्ष से प्रमाण की ओर गमन पर आधारित है।

  • 31

    पुस्तक प्रणाली व सूत्र प्रणाली निम्न में से किस शिक्षण विधि के ही दूसरे रूप हैं

    निगमन विधि

  • 32

    सूत्र विधि का दूसरा नाम क्या है

    निगमन विधि

  • 33

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इस विधि में प्रत्यक्ष उदाहरणों, अनुभवों तथा प्रयोगों का विस्तृत अध्ययन करके निष्कर्ष निकाले जाते हैं, सामान्य नियमों का निर्धारण किया जाता है। 2. इस विधि में किसी परिभाषा, सामान्य नियम या सूत्र को सत्य मान लेते हैं और उसे विशिष्ट उदाहरणों या परिस्थितियों में लागू करते हैं तथा उसे सिद्ध करने का प्रयास करते हैं। किस विधि का मानना है कि नियम शाश्वत सत्यों व यथार्थ तथ्यों की व्याख्या करने के साधन हैं। 3. यह छोटी कक्षाओं के लिए सर्वाधिक उपयोगी एवं उपयुक्त विधि है। 4. इस विधि का प्रयोग उच्च कक्षाओं के शिक्षण में अधिक किया जाता है। 5. हिंदी सीखना आरंभ करने वालों के लिए यह विधि उपयुक्त है। 6. हिंदी सीखना आरंभ करने वालों के लिए यह विधि उपयुक्त नहीं है।

    1,3,5

  • 34

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इस विधि में प्रत्यक्ष उदाहरणों, अनुभवों तथा प्रयोगों का विस्तृत अध्ययन करके निष्कर्ष निकाले जाते हैं, सामान्य नियमों का निर्धारण किया जाता है। 2. इस विधि में किसी परिभाषा, सामान्य नियम या सूत्र को सत्य मान लेते हैं और उसे विशिष्ट उदाहरणों या परिस्थितियों में लागू करते हैं तथा उसे सिद्ध करने का प्रयास करते हैं। किस विधि का मानना है कि नियम शाश्वत सत्यों व यथार्थ तथ्यों की व्याख्या करने के साधन हैं। 3. यह छोटी कक्षाओं के लिए सर्वाधिक उपयोगी एवं उपयुक्त विधि है। 4. इस विधि का प्रयोग उच्च कक्षाओं के शिक्षण में अधिक किया जाता है। 5. हिंदी सीखना आरंभ करने वालों के लिए यह विधि उपयुक्त है। 6. हिंदी सीखना आरंभ करने वालों के लिए यह विधि उपयुक्त नहीं है।

    2,4,6

  • 35

    आगमन विधि विशेष दृष्टांतों की सहायता से सामान्य नियमों को विधिपूर्वक प्राप्त करने की क्रिया है। यह परिभाषा किसने दी

    जॉयसी

  • 36

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह बालक की सूक्ष्म बुद्धि एवं सूझ की वृद्धि के लिए उपयोगी है। 2. इस विधि से बालकों की स्मरण शक्ति विकसित होती है क्योंकि इस विधि में बालकों को अनेक सूत्र याद करने पड़ते हैं। 3. इस विधि द्वारा बालकों में समस्या समाधान की योग्यता, प्रश्नों को हल करने की योग्यता एवं क्षमता का विकास संभव नहीं है। 4. नवीन समस्याओं ,नये प्रश्नों का समाधान इस विधि द्वारा किया जा सकता है। 5. इस विधि द्वारा प्राप्त ज्ञान क्रमबद्ध नहीं होता है। 6. इस विधि द्वारा क्रमबद्ध ज्ञान प्राप्त होता है। यह विधि ज्ञानार्जन की गति को तीव्र करती है।

    1,3,5

  • 37

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह बालक की सूक्ष्म बुद्धि एवं सूझ की वृद्धि के लिए उपयोगी है। 2. इस विधि से बालकों की स्मरण शक्ति विकसित होती है क्योंकि इस विधि में बालकों को अनेक सूत्र याद करने पड़ते हैं। 3. इस विधि द्वारा बालकों में समस्या समाधान की योग्यता, प्रश्नों को हल करने की योग्यता एवं क्षमता का विकास संभव नहीं है। 4. नवीन समस्याओं ,नये प्रश्नों का समाधान इस विधि द्वारा किया जा सकता है। 5. इस विधि द्वारा प्राप्त ज्ञान क्रमबद्ध नहीं होता है। 6. इस विधि द्वारा क्रमबद्ध ज्ञान प्राप्त होता है। यह विधि ज्ञानार्जन की गति को तीव्र करती है।

    2,4,6

  • 38

    आगमन निगमन विधि के विस्तृत रूप को विश्लेषण पद्धति कहते हैं। विश्लेषण पद्धति की प्रक्रिया के पद क्रमानुसार बताएं 1. उदाहरण (आवश्यक उदाहरण प्रस्तुत करना) 2. विश्लेषण (उदाहरण का निरीक्षण करना) 3. सामान्यीकरण (उदाहरण के आधार पर किसी सामान्य नियम का निर्धारण करना) 4. परीक्षण (नियमों का परीक्षण एवं सत्यापन की पुष्टि करना)

    1,2,3,4

  • 39

    गणित शिक्षण में स्थायित्व प्राप्ति की विधि है

    आगमन

  • 40

    किस विधि में छात्र विशिष्ट से सामान्य की ओर अग्रसर होते हैं

    आगमन विधि

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    तत्व यौगिक एवं मिश्रण

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    26問 • 1年前
    Rajan Singh Meharu

    問題一覧

  • 1

    "स्थूल तत्वों के आधार पर अपनी मानसिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए किसी विशेष सिद्धांत, नियम अथवा सूत्र तक पहुंचता है, विशिष्ट से सामान्य की ओर या स्थूल से सूक्ष्म की ओर जो नियम निकलवाए जाते हैं वे आगमन विधि के अंतर्गत आते हैं" यह परिभाषा किसने दी

    यंग

  • 2

    "जब हम बालकों के सम्मुख बहुत से तथ्य, उदाहरण या वस्तुएं प्रस्तुत करते हैं और फिर उनसे अपने स्वयं के निष्कर्ष निकलवाने का प्रयत्न करते हैं तब हम शिक्षण की आगमन विधि का प्रयोग करते हैं। " यह परिभाषा किसने दी

    लेडन

  • 3

    आगमन विधि की प्रक्रिया के पद क्रमानुसार बताएं 1. आवश्यक उदाहरण प्रस्तुत करना 2. उदाहरण का निरीक्षण करना 3. उदाहरण के आधार पर किसी सामान्य नियम का निर्धारण करना 4. नियमों का परीक्षण एवं सत्यापन की पुष्टि करना

    1,2,3,4

  • 4

    निर्गमन विधि की प्रक्रिया के पद क्रमानुसार बताएं 1. प्रकरण पर आधारित नियमों , सूत्रों व सिद्धांतों का प्रस्तुतीकरण। 2. विशिष्ट उदाहरणों की प्रस्तुति 3. उदाहरणों को नियमों से संबंधित करना व संस्थापन करना।

    1,2,3

  • 5

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. विशिष्ट से सामान्य की ओर 2. सामान्य से विशिष्ट की ओर 3. स्थूल से सूक्ष्म की ओर 4. सूक्ष्म से स्थूल की ओर 5. यथार्थ से अमूर्त की ओर शिक्षण सूत्र प्रयुक्त होते हैं 6. अमूर्त से यथार्थ की ओर शिक्षण सूत्र प्रयुक्त होते हैं

    1,3,5

  • 6

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. विशिष्ट से सामान्य की ओर 2. सामान्य से विशिष्ट की ओर 3. स्थूल से सूक्ष्म की ओर 4. सूक्ष्म से स्थूल की ओर 5. यथार्थ से अमूर्त की ओर शिक्षण सूत्र प्रयुक्त होते हैं 6. अमूर्त से यथार्थ की ओर शिक्षण सूत्र प्रयुक्त होते हैं

    2,4,6

  • 7

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह विकासोन्मुख व क्रियाशील क्रियाविधि है। 2. इसमें बालक को नियम, सूचना, सूत्र तथा तथ्य पहले ही बता दिये जाता है अतः बालक क्रियाशील नहीं रहता है। 3. इसमें बालक की आवश्यकता व रुचि का ध्यान रखा जाता है 4. इसमें बालक की आवश्यकता व रुचि का ध्यान नहीं रखा जाता है। 5. इसमें विद्यार्थी उदाहरणों की सहायता से स्वयं नियम बनाते हैं, इससे उनमें खोज की प्रवृत्ति का विकास होता है। 6. यह पूर्व स्थापित नियमों व तथ्यों के मध्य संबंध स्थापना का कार्य करती है।

    1,3,5

  • 8

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह विकासोन्मुख व क्रियाशील क्रियाविधि है। 2. इसमें बालक को नियम, सूचना, सूत्र तथा तथ्य पहले ही बता दिये जाता है अतः बालक क्रियाशील नहीं रहता है। 3. इसमें बालक की आवश्यकता व रुचि का ध्यान रखा जाता है 4. इसमें बालक की आवश्यकता व रुचि का ध्यान नहीं रखा जाता है। 5. इसमें विद्यार्थी उदाहरणों की सहायता से स्वयं नियम बनाते हैं, इससे उनमें खोज की प्रवृत्ति का विकास होता है। 6. यह पूर्व स्थापित नियमों व तथ्यों के मध्य संबंध स्थापना का कार्य करती है।

    2,4,6

  • 9

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. स्वयं सूत्र के निर्माण से अधिगम स्थाई होता है। सूत्र रटने नहीं पड़ते। 2. सूत्र रटने पड़ते हैं, अतः अधिगम अधिक स्थाई नहीं रह पाते। 3. नियमों व सिद्धांतों का निर्माण क्यों व कैसे तर्क द्वारा होता है। 4. तर्क करने की आवश्यकता ही नहीं होती क्योंकि नियम पूर्व स्थापित होते हैं। 5. क्रियाशीलता आधारित विधि है। 6. अधिगमकर्ता को निष्क्रिय माना जाता है।

    1,3,5

  • 10

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. स्वयं सूत्र के निर्माण से अधिगम स्थाई होता है। सूत्र रटने नहीं पड़ते। 2. सूत्र रटने पड़ते हैं, अतः अधिगम अधिक स्थाई नहीं रह पाते। 3. नियमों व सिद्धांतों का निर्माण क्यों व कैसे तर्क द्वारा होता है। 4. तर्क करने की आवश्यकता ही नहीं होती क्योंकि नियम पूर्व स्थापित होते हैं। 5. क्रियाशीलता आधारित विधि है। 6. अधिगमकर्ता को निष्क्रिय माना जाता है।

    2,4,6

  • 11

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इस विधि में बालक में वैज्ञानिक दृष्टिकोण व अवलोकन क्षमता का विकास होता है। 2. यह रटने की प्रवृत्ति को विकसित करती है तथा वैज्ञानिक विधि व वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करने में असमर्थ है। 3. यह गणित शिक्षण की मनोवैज्ञानिक एवं रोचक प्रणाली है। 4. यह मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों के विपरीत अप्राकृतिक विधि है, क्योंकि विद्यार्थियों को पूर्व में निर्धारित नियमों का सत्यापन मात्र करना होता है। 5. प्राप्त ज्ञान व्यवहारिक व स्थाई होता है, क्योंकि बालक स्वयं करके सीखता है। इस विधि में छात्र किसी नियम की पुष्टि उदाहरणों द्वारा करता है अतः वह जो भी ज्ञान प्राप्त करता है वह उसके मस्तिष्क में दृढ़ हो जाता है। 6. प्राप्त ज्ञान अस्पष्ट व अस्थाई होता है, विद्यार्थी यंत्रवत कार्य करते हैं।

    1,3,5

  • 12

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इस विधि में बालक में वैज्ञानिक दृष्टिकोण व अवलोकन क्षमता का विकास होता है। 2. यह रटने की प्रवृत्ति को विकसित करती है तथा वैज्ञानिक विधि व वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करने में असमर्थ है। 3. यह गणित शिक्षण की मनोवैज्ञानिक एवं रोचक प्रणाली है। 4. यह मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों के विपरीत अप्राकृतिक विधि है, क्योंकि विद्यार्थियों को पूर्व में निर्धारित नियमों का सत्यापन मात्र करना होता है। 5. प्राप्त ज्ञान व्यवहारिक व स्थाई होता है, क्योंकि बालक स्वयं करके सीखता है। इस विधि में छात्र किसी नियम की पुष्टि उदाहरणों द्वारा करता है अतः वह जो भी ज्ञान प्राप्त करता है वह उसके मस्तिष्क में दृढ़ हो जाता है। 6. प्राप्त ज्ञान अस्पष्ट व अस्थाई होता है, विद्यार्थी यंत्रवत कार्य करते हैं।

    2,4,6

  • 13

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इसमें बालक में तर्क एवं आत्मविश्वास परिपुष्ट होता है, सूझ द्वारा ज्ञान प्राप्त होता है, तथा निरीक्षण शक्ति का विकास होता है। यह विधि चैतन्यता व आत्मविश्वास जागृत करती है। यह विधि भावी जीवन में खोज का मार्ग प्रशस्त करती है। यह विधि स्वयं खोज पर आधारित विधि है। 2. इस विधि में तर्क, चिंतन व खोज आदि शक्तियां विकसित नहीं हो पाती हैं। 3. किस विधि में सरलता से नियम का निर्माण किया जा सकता है, अतः यह एक सरल व रोचक विधि है। 4. विद्यार्थियों को निष्कर्ष व नियम पूर्व में ही ज्ञात होता है अतः रुचि नहीं रह पाती है। 5. इस विधि द्वारा सीखने में समय व शक्ति का अत्यधिक अपव्यय होता है तथा इस विधि द्वारा समस्त नियमों का शिक्षण संभव नहीं है। 6. इस विधि में समय की बचत होती है। पाठ्यक्रम शीघ्रता से पूर्ण हो सकता है।

    1,3,5

  • 14

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इसमें बालक में तर्क एवं आत्मविश्वास परिपुष्ट होता है, सूझ द्वारा ज्ञान प्राप्त होता है, तथा निरीक्षण शक्ति का विकास होता है। यह विधि चैतन्यता व आत्मविश्वास जागृत करती है। यह विधि भावी जीवन में खोज का मार्ग प्रशस्त करती है। यह विधि स्वयं खोज पर आधारित विधि है। 2. इस विधि में तर्क, चिंतन व खोज आदि शक्तियां विकसित नहीं हो पाती हैं। 3. किस विधि में सरलता से नियम का निर्माण किया जा सकता है, अतः यह एक सरल व रोचक विधि है। 4. विद्यार्थियों को निष्कर्ष व नियम पूर्व में ही ज्ञात होता है अतः रुचि नहीं रह पाती है। 5. इस विधि द्वारा सीखने में समय व शक्ति का अत्यधिक अपव्यय होता है तथा इस विधि द्वारा समस्त नियमों का शिक्षण संभव नहीं है। 6. इस विधि में समय की बचत होती है। पाठ्यक्रम शीघ्रता से पूर्ण हो सकता है।

    2,4,6

  • 15

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यदि बालक एक बार अशुद्ध सिद्धांत या नियम निकाल लेता है तो उसे पुनः शुद्ध ज्ञात करना कठिन हो जाता है। 2. इस विधि द्वारा ज्ञात नियमों की सत्यता की जांच आसानी से हो जाती है। 3. केवल योग्य एवं प्रतिभाशाली छात्र ही तथ्यों के आधार पर सामान्य नियमों का निर्धारण कर सकते हैं। 4. नियम पहले से निर्धारित होते हैं। यह विधि उच्च कक्षा के विद्यार्थियों के लिए ही उपयोगी है। 5. यह विधि विशेष तौर पर अंकगणित तथा रेखा गणित में अधिक प्रयुक्त होती है। 6. यह विधि बीजगणित में अधिक प्रयुक्त होती है जहां सूत्र याद रखने का कार्य अधिक होता है।

    1,3,5

  • 16

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यदि बालक एक बार अशुद्ध सिद्धांत या नियम निकाल लेता है तो उसे पुनः शुद्ध ज्ञात करना कठिन हो जाता है। 2. इस विधि द्वारा ज्ञात नियमों की सत्यता की जांच आसानी से हो जाती है। 3. केवल योग्य एवं प्रतिभाशाली छात्र ही तथ्यों के आधार पर सामान्य नियमों का निर्धारण कर सकते हैं। 4. नियम पहले से निर्धारित होते हैं। यह विधि उच्च कक्षा के विद्यार्थियों के लिए ही उपयोगी है। 5. यह विधि विशेष तौर पर अंकगणित तथा रेखा गणित में अधिक प्रयुक्त होती है। 6. यह विधि बीजगणित में अधिक प्रयुक्त होती है जहां सूत्र याद रखने का कार्य अधिक होता है।

    2,4,6

  • 17

    किसी त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180 डिग्री होता है, नियम के निर्माण हेतु किस विधि का प्रयोग करेंगे

    आगमन विधि

  • 18

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह विधि "विशिष्ट से सामान्य" "उदाहरण से नियम" "स्थूल से सूक्ष्म की ओर" है। 2. यह विधि "सामान्य से विशिष्ट" "नियम से उदाहरण" तथा "सूक्ष्म से स्थूल की ओर" है। 3. इसमें बालक एक अनुसंधानकर्ता के रूप में कार्य करता है तथा स्वयं सक्रिय रहकर नियम या सूत्र ज्ञात करता है । 4. किसने बालक को नियम अथवा सूत्र पहले ही बता दिए जाते हैं। बालक खोजे गए नियम अथवा सूत्रों की पुष्टि मात्र ही कर पता है। 5. इस विधि द्वारा छात्रों में खोज प्रवृत्ति का विकास होता है। 6. इसमें छात्रों को खोज प्रवृत्ति विकसित करने का अवसर नहीं मिलता है।

    1,3,5

  • 19

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह विधि "विशिष्ट से सामान्य" "उदाहरण से नियम" "स्थूल से सूक्ष्म की ओर" है। 2. यह विधि "सामान्य से विशिष्ट" "नियम से उदाहरण" तथा "सूक्ष्म से स्थूल की ओर" है। 3. इसमें बालक एक अनुसंधानकर्ता के रूप में कार्य करता है तथा स्वयं सक्रिय रहकर नियम या सूत्र ज्ञात करता है । 4. किसने बालक को नियम अथवा सूत्र पहले ही बता दिए जाते हैं। बालक खोजे गए नियम अथवा सूत्रों की पुष्टि मात्र ही कर पता है। 5. इस विधि द्वारा छात्रों में खोज प्रवृत्ति का विकास होता है। 6. इसमें छात्रों को खोज प्रवृत्ति विकसित करने का अवसर नहीं मिलता है।

    2,4,6

  • 20

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह अध्यापन की श्रेष्ठ विधि है। 2. यह अध्ययन या अधिगम की श्रेष्ठ विधि है। 3. यह विधि छोटी कक्षाओं के शिक्षण में अधिक उपयोगी है। 4. यह विधि उच्च कक्षाओं के लिए अधिक उपयोगी है। 5. इस विधि में बालक स्वयं नियम एवं सूत्रों का निर्धारण करते हैं, जिससे उनमें आत्मविश्वास एवं आत्मनिर्भरता जैसे गुणों का विकास होता है । 6. इसमें नियम या सूत्रों को पहले ही बता दिया जाता है जिससे उनमें आत्मविश्वास की कमी रहती है ।

    1,3,5

  • 21

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह अध्यापन की श्रेष्ठ विधि है। 2. यह अध्ययन या अधिगम की श्रेष्ठ विधि है। 3. यह विधि छोटी कक्षाओं के शिक्षण में अधिक उपयोगी है। 4. यह विधि उच्च कक्षाओं के लिए अधिक उपयोगी है। 5. इस विधि में बालक स्वयं नियम एवं सूत्रों का निर्धारण करते हैं, जिससे उनमें आत्मविश्वास एवं आत्मनिर्भरता जैसे गुणों का विकास होता है । 6. इसमें नियम या सूत्रों को पहले ही बता दिया जाता है जिससे उनमें आत्मविश्वास की कमी रहती है ।

    2,4,6

  • 22

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह विधि नवीन ज्ञान की खोज करने में सहायक है। 2. इस विधि में बालक दूसरों के द्वारा दिए गए ज्ञान का प्रयोग करते हैं। 3. यह एक वैज्ञानिक विधि है, जिससे छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होता है। 4. इस विधि में बालकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होने के अवसर नहीं मिलते हैं। 5. यह विधि खोज या अनुसंधान का मार्ग है। 6. यह अनुकरण का मार्ग है।

    1,3,5

  • 23

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह विधि नवीन ज्ञान की खोज करने में सहायक है। 2. इस विधि में बालक दूसरों के द्वारा दिए गए ज्ञान का प्रयोग करते हैं। 3. यह एक वैज्ञानिक विधि है, जिससे छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होता है। 4. इस विधि में बालकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होने के अवसर नहीं मिलते हैं। 5. यह विधि खोज या अनुसंधान का मार्ग है। 6. यह अनुकरण का मार्ग है।

    2,4,6

  • 24

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इस विधि में शिक्षक व शिक्षार्थी दोनों ही सक्रिय रहते हैं। अतः यह विधि छात्र केंद्रित विधि है। 2. इस विधि में शिक्षक ही अधिक सक्रिय रहता है। शिक्षार्थी एक मूक श्रोता होता है। अतः यह अध्यापक केंद्रित विधि है। 3. यह विधि मौलिक एवं रचनात्मक कार्यों पर बल देती है। 4. यह विधि समस्या समाधान पर बल देती है। 5. इस विधि में अध्ययन अध्यापन की प्रक्रिया रुचिकर हो जाती है। 6. इस विधि में अध्ययन अध्यापन की प्रक्रिया नीरस हो जाती है।

    1,3,5

  • 25

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इस विधि में शिक्षक व शिक्षार्थी दोनों ही सक्रिय रहते हैं। अतः यह विधि छात्र केंद्रित विधि है। 2. इस विधि में शिक्षक ही अधिक सक्रिय रहता है। शिक्षार्थी एक मूक श्रोता होता है। अतः यह अध्यापक केंद्रित विधि है। 3. यह विधि मौलिक एवं रचनात्मक कार्यों पर बल देती है। 4. यह विधि समस्या समाधान पर बल देती है। 5. इस विधि में अध्ययन अध्यापन की प्रक्रिया रुचिकर हो जाती है। 6. इस विधि में अध्ययन अध्यापन की प्रक्रिया नीरस हो जाती है।

    2,4,6

  • 26

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इस विधि में प्रत्येक पद का महत्व होता है तथा बालक उनको लिखना सीख जाते हैं। 2. इस विधि में बालक बहुत से पदों को लिखना नहीं सीख पाते हैं। 3. इस विधि की गति धीमी है, जिससे परिश्रम व समय अधिक लगता है। 4. इस विधि की गति तीव्र होती है, जिससे परिश्रम का समय कम लगता है। 5. यह एक मनोवैज्ञानिक विधि है, जो कि अवबोध केंद्रित है। 6. यह एक अमनोवैज्ञानिक विधि है तथा स्मृति केंद्रित है।

    1,3,5

  • 27

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इस विधि में प्रत्येक पद का महत्व होता है तथा बालक उनको लिखना सीख जाते हैं। 2. इस विधि में बालक बहुत से पदों को लिखना नहीं सीख पाते हैं। 3. इस विधि की गति धीमी है, जिससे परिश्रम व समय अधिक लगता है। 4. इस विधि की गति तीव्र होती है, जिससे परिश्रम का समय कम लगता है। 5. यह एक मनोवैज्ञानिक विधि है, जो कि अवबोध केंद्रित है। 6. यह एक अमनोवैज्ञानिक विधि है तथा स्मृति केंद्रित है।

    2,4,6

  • 28

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. नियम ज्ञात करने होते हैं इसलिए अध्यापक को अधिक परिश्रम की आवश्यकता होती हैैं अतः अनुभवी व प्रशिक्षित अध्यापकों की कमी के कारण यह विधि सफल नहीं हो पाती है। 2. नियम पहले से ज्ञात होते हैं अतः अनुभवी व प्रशिक्षित अध्यापकों की अधिक आवश्यकता नहीं होती। 3. किस विधि में विद्यार्थियों को सूत्र नियम याद नहीं रखने होते हैं। 4. इस विधि में विद्यार्थियों को कई सूत्र, सिद्धांत एवं नियम याद करने होते हैं, इससे विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति का विकास होता है। इस विधि में छात्रों को रटने की आदत पड़ जाती है जिससे उनका मानसिक विकास नहीं हो पता है। इस विधि से प्राप्त ज्ञान अस्थाई होता है क्योंकि सीखे गए नियमों, सिद्धांतों को ज्ञात करने की विधि छात्रों को नहीं सिखाई जाती है। इस विधि में भिन्न-भिन्न प्रकार के प्रश्नों के लिए अनेक सूत्र याद करने होते हैं जो एक कठिन कार्य है। 5. इस विधि में छात्रों को अधिक परिश्रम करना पड़ता है। 6. इस विधि में छात्रों को नियम पहले ही बता दिए जाते हैं अतः उन्हें कम परिश्रम करना पड़ता है।

    1,3,5

  • 29

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. नियम ज्ञात करने होते है इसलिए अध्यापक को अधिक परिश्रम की आवश्यकता होती हैैं। अतः अनुभवी व प्रशिक्षित अध्यापकों की कमी के कारण यह विधि सफल नहीं हो पाती है। 2. नियम पहले से ज्ञात होते हैं अतः अनुभवी व प्रशिक्षित अध्यापकों की अधिक आवश्यकता नहीं होती। 3. किस विधि में विद्यार्थियों को सूत्र नियम याद नहीं रखने होते हैं। 4. इस विधि में विद्यार्थियों को कई सूत्र, सिद्धांत एवं नियम याद करने होते हैं, इससे विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति का विकास होता है। इस विधि में छात्रों को रटने की आदत पड़ जाती है जिससे उनका मानसिक विकास नहीं हो पता है। इस विधि से प्राप्त ज्ञान अस्थाई होता है क्योंकि सीखे गए नियमों, सिद्धांतों को ज्ञात करने की विधि छात्रों को नहीं सिखाई जाती है। इस विधि में भिन्न-भिन्न प्रकार के प्रश्नों के लिए अनेक सूत्र याद करने होते हैं जो एक कठिन कार्य है। 5. इस विधि में छात्रों को अधिक परिश्रम करना पड़ता है। 6. इस विधि में छात्रों को नियम पहले ही बता दिए जाते हैं अतः उन्हें कम परिश्रम करना पड़ता है।

    2,4,6

  • 30

    निगमन विधि के बारे में निम्न में से कौन सा कथन असत्य है

    यह प्रत्यक्ष से प्रमाण की ओर गमन पर आधारित है।

  • 31

    पुस्तक प्रणाली व सूत्र प्रणाली निम्न में से किस शिक्षण विधि के ही दूसरे रूप हैं

    निगमन विधि

  • 32

    सूत्र विधि का दूसरा नाम क्या है

    निगमन विधि

  • 33

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इस विधि में प्रत्यक्ष उदाहरणों, अनुभवों तथा प्रयोगों का विस्तृत अध्ययन करके निष्कर्ष निकाले जाते हैं, सामान्य नियमों का निर्धारण किया जाता है। 2. इस विधि में किसी परिभाषा, सामान्य नियम या सूत्र को सत्य मान लेते हैं और उसे विशिष्ट उदाहरणों या परिस्थितियों में लागू करते हैं तथा उसे सिद्ध करने का प्रयास करते हैं। किस विधि का मानना है कि नियम शाश्वत सत्यों व यथार्थ तथ्यों की व्याख्या करने के साधन हैं। 3. यह छोटी कक्षाओं के लिए सर्वाधिक उपयोगी एवं उपयुक्त विधि है। 4. इस विधि का प्रयोग उच्च कक्षाओं के शिक्षण में अधिक किया जाता है। 5. हिंदी सीखना आरंभ करने वालों के लिए यह विधि उपयुक्त है। 6. हिंदी सीखना आरंभ करने वालों के लिए यह विधि उपयुक्त नहीं है।

    1,3,5

  • 34

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. इस विधि में प्रत्यक्ष उदाहरणों, अनुभवों तथा प्रयोगों का विस्तृत अध्ययन करके निष्कर्ष निकाले जाते हैं, सामान्य नियमों का निर्धारण किया जाता है। 2. इस विधि में किसी परिभाषा, सामान्य नियम या सूत्र को सत्य मान लेते हैं और उसे विशिष्ट उदाहरणों या परिस्थितियों में लागू करते हैं तथा उसे सिद्ध करने का प्रयास करते हैं। किस विधि का मानना है कि नियम शाश्वत सत्यों व यथार्थ तथ्यों की व्याख्या करने के साधन हैं। 3. यह छोटी कक्षाओं के लिए सर्वाधिक उपयोगी एवं उपयुक्त विधि है। 4. इस विधि का प्रयोग उच्च कक्षाओं के शिक्षण में अधिक किया जाता है। 5. हिंदी सीखना आरंभ करने वालों के लिए यह विधि उपयुक्त है। 6. हिंदी सीखना आरंभ करने वालों के लिए यह विधि उपयुक्त नहीं है।

    2,4,6

  • 35

    आगमन विधि विशेष दृष्टांतों की सहायता से सामान्य नियमों को विधिपूर्वक प्राप्त करने की क्रिया है। यह परिभाषा किसने दी

    जॉयसी

  • 36

    आगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह बालक की सूक्ष्म बुद्धि एवं सूझ की वृद्धि के लिए उपयोगी है। 2. इस विधि से बालकों की स्मरण शक्ति विकसित होती है क्योंकि इस विधि में बालकों को अनेक सूत्र याद करने पड़ते हैं। 3. इस विधि द्वारा बालकों में समस्या समाधान की योग्यता, प्रश्नों को हल करने की योग्यता एवं क्षमता का विकास संभव नहीं है। 4. नवीन समस्याओं ,नये प्रश्नों का समाधान इस विधि द्वारा किया जा सकता है। 5. इस विधि द्वारा प्राप्त ज्ञान क्रमबद्ध नहीं होता है। 6. इस विधि द्वारा क्रमबद्ध ज्ञान प्राप्त होता है। यह विधि ज्ञानार्जन की गति को तीव्र करती है।

    1,3,5

  • 37

    निगमन विधि की प्रमुख विशेषताएं कौन-कौन सी हैं 1. यह बालक की सूक्ष्म बुद्धि एवं सूझ की वृद्धि के लिए उपयोगी है। 2. इस विधि से बालकों की स्मरण शक्ति विकसित होती है क्योंकि इस विधि में बालकों को अनेक सूत्र याद करने पड़ते हैं। 3. इस विधि द्वारा बालकों में समस्या समाधान की योग्यता, प्रश्नों को हल करने की योग्यता एवं क्षमता का विकास संभव नहीं है। 4. नवीन समस्याओं ,नये प्रश्नों का समाधान इस विधि द्वारा किया जा सकता है। 5. इस विधि द्वारा प्राप्त ज्ञान क्रमबद्ध नहीं होता है। 6. इस विधि द्वारा क्रमबद्ध ज्ञान प्राप्त होता है। यह विधि ज्ञानार्जन की गति को तीव्र करती है।

    2,4,6

  • 38

    आगमन निगमन विधि के विस्तृत रूप को विश्लेषण पद्धति कहते हैं। विश्लेषण पद्धति की प्रक्रिया के पद क्रमानुसार बताएं 1. उदाहरण (आवश्यक उदाहरण प्रस्तुत करना) 2. विश्लेषण (उदाहरण का निरीक्षण करना) 3. सामान्यीकरण (उदाहरण के आधार पर किसी सामान्य नियम का निर्धारण करना) 4. परीक्षण (नियमों का परीक्षण एवं सत्यापन की पुष्टि करना)

    1,2,3,4

  • 39

    गणित शिक्षण में स्थायित्व प्राप्ति की विधि है

    आगमन

  • 40

    किस विधि में छात्र विशिष्ट से सामान्य की ओर अग्रसर होते हैं

    आगमन विधि